Tuesday, March 12, 2013

वह जो चले जाते हैं उस पार



वह जो चले जाते हैं उस पार 
छोड़ जाते हैं अपने विचार 
उनके भाव बरसाते रहते 
जीवन की गोपनीय रसधार 


वह जो चले जाते हैं उस पार 
सुरक्षित रहता है उनका प्यार 
ये प्यार 'रिले रेस' की तरह 
पीढी दर पीढी, श्रद्धा संचार 

वह जो चले गए उस पार 
नहीं उनसे संवाद अधिकार 
फिर भी बतियाता संसार 
पहन कर यादों के हार 

क्या जाने, क्या होता है उस पार 
देह से परे, क्या है जुड़ाव का सार 
मृत्यु जीवन को परिभाषित करती है 
या जीवन ही है, जीवन के पार 
 
अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 
1  मार्च २० १३ 

3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

कौन जाने क्या उधर है?

Anupama Tripathi said...

भीगी सी यादें ही रह जातीं हैं ...उस पार जाने वालों की ....जब भी आती है आँख नाम कर जातीं हैं ....

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

क्या बात
बहुत सुंदर

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