Thursday, November 2, 2017

आनंदित निर्झर




छम छम बरसे
प्रेमामृत सा
खिला करूण
अलोक अपरिमित
मौन मधुर
झीना झीना सा
सरस सूक्ष्म 
आनंदित निर्झर
तन्मय बेसुध 
लीन.... 



अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 
नवम्बर १ , २०१७ 

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...