Friday, November 2, 2012

रहस्य की अगणित परते


तो अपने शहर में 
जगह जगह 
गिरे हुए दरख्तों का दर्द सुनते हुए 
कहीं कहीं 
जड़ों सहित उखाड़ दिए गए 
विशाल पेड़ का दर्द महसूस करते हुए 
शक्ति और सौन्दर्य की 
झकझोर देने वाली 
लहरों का 
अपने नगर के कुछ मुहल्लों में 
आ धमकने से उठा कोहराम 
देखते हुए 

वो अब तक सकते में था 
जैसे कोइ हमारे सारे खेल को 
तोड़ ताड कर फेंकने के लिए आया था 
या 
शायद हमें खेल का वो आयाम दिखा देने के लिए चला आया था 
जिसे हम देख नहीं पा रहे हैं 

सुविधाएँ जीवन का पर्याय नहीं हैं 
निश्चितता को स्थाई निवास स्थल नहीं मिलता है 

जीवन का जो जादू है 
उसके साथ रहस्य की अगणित परते हैं 

वो इन सब परतों के पार 
देखने की कोशिः करता तो उसे किसी टूटे हुए मकान का दृश्य असहज कर देता 
उसने सोचा 
धरती माँ से ही पूछ ले 
'माँ आपने कियों किया ऐसा'

फिर देखा 
माँ से संपर्क वाला तार तो 
तूफ़ान के बहुत पहले से टूटा हुआ था 


अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 

आनंदित निर्झर

छम छम बरसे प्रेमामृत सा खिला करूण अलोक अपरिमित मौन मधुर झीना झीना सा सरस सूक्ष्म  आनंदित निर्झर तन्मय बेसुध  लीन....  ...