Saturday, October 27, 2012

प्यार तुम्हारा


देख रहा हूँ 
प्यार तुम्हारा 
साँसों में
 रहता आया चिरकाल से 
मुक्त करे है 
हंस हंस कर ये 
हर अतृप्ति की ताल से 

रोते रोते भी 
अक्सर ऐसा ही होता 
आया है 
हंसा गए 
कुछ नए द्वार 
जो उग आये दीवाल से

साथ तुम्हारा
जगमग करता
पग पग पर उजियारा है
लिए भरोसा
रूप तुम्हारा
दिख जाए हर हाल से


अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
शनिवार
 27 अक्टूबर 2012 

1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

ताक रहे हैं, खड़े अभी तक।

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...