Tuesday, December 13, 2011

वो जीत गया

 
कल और आज के बीच
दिन तो एक ही बीता 
पर आज
 कुछ नया सा लगा 
दर्पण के सामने


 
आत्म-सौन्दर्य में नहाई मुस्कान
जिस पर किसी और का नहीं जा सकता ध्यान
पर मुझे दिखी एक क्षण अपनी आँखों में उसकी पहचान
जिसका साँसों में चलता रहता है गुणगान
 
 
कल और आज के बीच
दिन को एक ही बीता
पर
कितना कुछ बीत गया
और यूँ लगता है
जिसे जीतना चाहिए था
वो जीत गया
 
   
अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका  
१३ दिसम्बर २०११
 
        

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

हर दिन कुछ न कुछ नया दे जाता है।

Rakesh Kumar said...

कल और आज के बीच
दिन को एक ही बीता
पर
कितना कुछ बीत गया
और यूँ लगता है
जिसे जीतना चाहिए था
वो जीत गया

जिसने उसको समझा और पाया वही जीता.
नित प्रयास भी होता रहे तो यह भी जीत ही है.

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...