Tuesday, October 18, 2011

रस की धारा

 
जीवन प्यारा
रस की धारा
सांस-सांस में
है उजियारा



सार निखारा
तुम्हें पुकारा
हुआ उजागर
प्रेम हमारा


अशोक व्यास


1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

पुकार में ही प्रेम छिपा है।

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