Saturday, April 16, 2011

तुम कौन हो


ऐ जी
तुम कौन हो
उसी एक बात को नया नया कर देते हो
देखने मात्र से सारे संशय हर लेते हो
कैसे संभव हो जाता है तुम्हारे लिए 
हर बार मुझे शुद्ध प्रेम से भर देते हो

ओ मौन सखा
आज फिर तुमने मुझे उबारा
सुन्दर कर दिया संसार सारा
बिना जताए अपनी उपस्थिति
दे दिया मुझे फिर सहारा


अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
१६ अप्रैल 2011 

3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

सर्वप्रिय।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुन्दर अभिव्यक्ति ...

anupama's sukrity ! said...

सुंदर भावपूर्ण रचना

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...