Wednesday, January 19, 2011

तुममें ही परम कल्याण का सार


इस बार 
गंगा की धारा को 
बुला कर
सौंप दिया अपना आप
कह दिया "लो माँ
धुल दो
सारे दुःख-शोक, संताप"
 
उजला और स्वच्छ बना कर
पतित पावनी गंगा मुस्कुराई
जब भी तुम्हारे मन का होने लगे बुरा हाल 
तो मुझे बुलाने में देर ना लगाना मेरे लाल 

यूँ तो मैं नित्य तुम्हारे भीतर ही  करती हूँ निवास
पर बिन बुलावे कहीं ना जाने का बना है अभ्यास 
 
जो स्वयं का करना चाहते हैं उद्धार 
मुझे बुलावा भेजता है उनका प्यार 
शिव भी तुममें, भागीरथ भी तुममें
तुममें ही परम कल्याण का सार 

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
बुधवार, १९ जनवरी 2011










वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...