Sunday, January 9, 2011

आस्था आशा की बड़ी बहन है


क्षितिज पर 
पहुँच कर
मेरे हाथों ने
कुछ देर के लिए
मिला दिया था
धरती को आसमान से
जैसे कोई नन्हा बच्चा 
पापा और मम्मी के हाथ थाम
दोनों को मिला दे
उनके बीच चलते चलते
 
२ 
अपनी पहचान का
नया-नया रूप
मिल जाता है 
मुझे हर दिन
जहाँ से
उस असीम को
भेजता हूँ निमंत्रण
शब्द नगरी में
हर दिन वह कहला देता है
'आज नहीं कल आऊँगा'
इस तरह 'व्यक्त' ना होकर भी
वो मुझ पर 
करता है कृपा


आस्था आशा की बड़ी बहन है
या शायद जननी है
पर 
सज-धज कर
नए सन्दर्भों में
चुस्ती से अपनी शोखी लिए
आशा के रूठ जाने पर 
उसे मना कर
मुस्कुराती है
और सौम्य आभा से
आशा को
सूरज की किरणों के साथ
खेलने ले आती है
मैं आशा नहीं
आस्था की पीढी का हूँ
इसलिए आशा को
कभी अपनी गोदी में खिलाता हूँ
कभी तुतलाते स्वर में
उससे बतियाता हूँ
और कई कई बार
आशा की दिव्य मुस्कान में
अमिट आस्था की झलक पाता हूँ

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
रविवार, ९ जनवरी 2011

 


वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...