Friday, December 3, 2010

शाश्वत मिलन का अद्वितीय उत्सव


 
अब जब
साफ़ दिख रहा है
सूरज की किरणों में
तुम्हारा चेहरा
और
ऊष्मा यह प्रेम की
सोंख रहा है
मेरा रोम- रोम
अधमुंदी आँखों से
देख कर 
पुष्टि करना चाहता हूँ
यह जो 
महसूस कर रहा हूँ
तुम्हारा होना
अपने आस पास
कहीं तुम भी
देख तो रहे होंगे मुझे
और
तुम्हारी दृष्टि से
पोषित है
यह जो उल्लास सा
मन में
इसे लेकर
नृत्य करने की यह स्निग्ध उमंग, 

लो
सहसा
निश्चल मौन में
सज गया है
शाश्वत मिलन का
अद्वितीय उत्सव

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
३ दिसंबर २०१०

1 comment:

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...