Tuesday, September 28, 2010

मेला तुम्हारा तुमसे ही है

 
बात उठाओ
ऐसी
जो
तुम्हे उठाये

उठ कर चलना किसी तरंग में
चढ़ कर बहना किसी लहर के साथ
तोड़ देता है खुमार
थाम कर समय की नई पतवार
आ सकते हो 
जड़ता के पार

कर सकते हो
हर सपना साकार
पर पहले
वो
बात उठाओ
कि तुम अपने सपने के साथ
एक मेक हो जाओ

उसे गुनगुनाओ
उसमें रम जाओ

अपने ह्रदय में
अपने लिए
विजय पताका फहराओ
यूँ ही ना 
रह जाओ

मेला तुम्हारा
तुमसे ही है
इस बात को ना
बिसराओ
 
 
अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका
२८ सितम्बर २०१०

 
 

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

बड़े प्रेरक विचार।

Apanatva said...

sapno ko saakar karane ek matr rasta aapne sahaj bata diya vo bhee pyaree see kavita ke roop me.
Aabhar .

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...