Friday, May 22, 2015

हकीकत से वास्ता रखता नहीं हूँ



बुजुर्गों की इनायत है 
उन्ही से ये रिवायत है 
दुआओं का असर देखो  
मेरा जीवन मोहब्बत है 

२ 
बुजुर्गों के सभी किस्से 
मेरी साँसों के हैं हिस्से 
सहेजूँ उसको कैसे मैं 
सहेजा जा रहा जिससे  

३ 

फिसल कर गिरने से बचाये है
माँ तेरी याद बहुत आये है
तेरी नज़रें इलाज़ करती हैं
चोट जब भी कोई लग जाए है 

४ 

अपने होने का हुनर सिखला रहे अब भी 
अपनी आँखों से, जहाँ दिखला रहे अब भी 
मुझमें ये जो रहता है कायम तमाम उम्र 
उसकी सूरत रात-दिन दिखला रहे अब भी 

 ५ 

अब किसी लफ्ज़ से पत्थर न बना
जलते शोले से अपना घर न बना 
सीख कुछ साथ रहने का सलीका 
शहर को खौफ का मंजर न बना 

६ 

सीख कर कोई नया गुर, क्या करें 
रात दिन उसका तस्सव्वुर, क्या करें 
बात जब रुक जाए तब रुक जाए है 
ऐसे में कोई नया सुर, क्या करें 

७ 

हकीकत से वास्ता रखता नहीं हूँ 
अपने घर में रास्ता रखता नहीं हूँ 


अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 
शुक्रवार, मई २२, २०१५ 





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