Monday, May 25, 2015

फूलों की नई नई घाटियाँ






शब्दों का हाथ थाम 

उतर कर  शिखर से 

आँख मूँद कर 

कुछ देर

अब 
 
देखता हूँ 

फूलों की नई नई घाटियाँ 

जहाँ तक ले आये हैं शब्द 

 
        - अशोक व्यास 

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वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...