Sunday, December 7, 2014

आत्मतुष्टि


"किसी मान्यता को हम देवता नहीं बनाते हैं,
आत्मा को देवता बनाते हैं,
(कर्म ) आत्मार्थ होना चाहिए,
आत्मतुष्टि आ रही है क्या?"

स्वामी श्री ईश्वरानन्द गिरी जी महाराज 

(प्रवचन '"अवतरण", अहमदाबाद, जुलाई १०. २०१४ से लिया गया वाक्य )

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