Saturday, June 21, 2014

परिणय बंधन


आपसी  स्वीकरण का 
सामाजिक उत्सव 
अनंत का अभिनन्दन है 

एक स्फूर्तिदायक पदचाप 
उसकी कृपा की 
जिससे मन, सुमन है 

भाव शुद्धि के साथ 
स्व-मिलन में सहायक, पावन 
परिणय बंधन है
गृहस्थी यानि 
रसमय संगम विविध अनुभवों का  
पग- पग परमात्म मिलन है 


अशोक व्यास, न्यूयार्क, अमेरिका 
२४ मई २०१४ 
(मनन और नताशा के लिए आशीष और शुभ कामनाओं सहित)

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