Saturday, June 21, 2014

आभार पुष्प


लौटा दूँ कैसे 
तुम्हें 
वह करूणा 
वह निश्छल प्रेम 
वह शुभ भाव वर्षण 

आभार पुष्प 
हाथ में लिए 
सौंपता हूँ 
सूर्य किरण को 
आश्वस्ति है 
रूप समेत कर भी अपना 
हो जहाँ भी 
अलोक है सहचर 
सन्देश मेरा 
प्रेम भाव, आभार सरस 
पहुँच ही जाएगा 
तुम तक 
जहां भी हो तुम 

ॐ 
२८ मई २०१४ 
(दिवंगत प्रेम मूर्ति शांति प्रसाद मूथा जी(जोधपुर) को समर्पित )

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