Tuesday, November 19, 2013

है किसे परवाह मेरी


१ 

सूरज ने कहा 
लो मैं आ गया 
मैंने अपना तेज़ दिखा दिया 
अब तुम दिखाओ 
क्या है तुम्हारे पास 

२ 

उसने संकोच से कहा 
किसे दिखाऊँ 
कौन देखना चाहता है 
है किसे परवाह मेरी 

सूरज ने हंस कर कहा 
अगर मैं भी तुम्हारी तरह सोचता 
तो उगने का समय हमेशा टालता ही रहता 
 
 
अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 
२० नवम्बर २०१३


1 comment:

Manu Tyagi said...

प्रिय ब्लागर
आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

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