Wednesday, July 10, 2013

समय का चेहरा


आधे अधूरे जीवन का दर्शन 
एक क्षण 
सहसा छूट गया 
न जाने कैसे 
अब जब 
समग्रता से दीखता है 
समय का चेहरा 
शिथिल हो गयी है 
पकड़ 
स्थितियों के पंजों की 
हर बार 
घेरे है 
मुझे विस्तार 
इस-उस के पार 
यह अनंत का अनवरत आधार 
बोध शाश्वत भोर का 
है किसका उपहार ?

मेरी हर सांस में खुल रहा सृष्टि के सौंदर्य का सार 
और दृष्टि में परम कृपालु के प्रति परम आभार 

अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 
१० जुलाई २० १ ३
 

1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

कृपा प्रेमसागर की बरसे।

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...