Sunday, February 12, 2012

साईं रंग-तरंग




मन चल, रंग जा साईं रंग
चल मन, रम जा साईं संग
साईं शरण लिए, मिल जाए 
  चिर मस्ती का ढंग
मन चल, रंग जा साईं रंग


 सकल जगत में शिरडी साईं
करे कृपा से दंग
देता है, वो प्रेम कोष से 
तज दे, झोली तंग
चल मन, रम जा साईं रंग

शांति प्रदायक, चरण शरण ले
मिट जाए हुडदंग
तृष्णा जाए, तृप्ति लाये 
साईं रंग-तरंग
मन चल, जी ले साईं संग
चल मन, हो ले साईं रंग
पावन पावन, अति पावन है
शिरडी सरस प्रसंग
चल मन, होकर मस्त-मलंग
जीतें काम-क्रोध से जंग


ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं

साईं साईं साईं साईं
भू पर साईं, नभ पर साईं
मुझमें साईं, तुझमें साईं
सकल सृष्टि में, साईं साईं

एक सत्य है, सत्य एक है
जिससे सब कुछ, वो है साईं
जिसमें सब कुछ, वो है साईं
व्यापक साईं, शाश्वत साईं


ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं

पल पल साईं, मंगल साईं
निर्मल साईं, निश्छल साईं
जिसने पाई, उसने गाई 
साईं महिमा, सब पर छाई


साईं साईं साईं साईं
प्रेम से बोलो
शिरडी  साईं
आकर बोलो
शिरडी साईं 
गाकर बोलो
शिरडी साईं


ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं

साईं बाबा, पार लगाना
पावन पथ पर, हमें चलाना
साँसों के अमृत की शोभा
बाबा हमको भी दिखलाना
धीरज देना, श्रद्धा देना
हर फिसलन से, हमें बचाना 
तुम हो दयालु, करूणा सागर
क्षमा शील, हमको अपनाना


जय बाबा, जय शिरडी साईं
तेरी महिमा, जबसे गाई
अंतर्मन में मस्ती छाई
जीवन में श्रद्धा गहराई
दुःख-शोक पीड़ा, छू मंतर 
जब तेरी आँखें मुस्काई

ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं


अशोक व्यास
फरवरी १२, २०१२ 

शिरडी साईं विश्व साईं




शिरडी साईं विश्व साईं
साईं अपने सदा सहाई

स्वयं प्रकाशित, मंगल कारी
साथ चलें, जैसे परछाई

उनकी करूणामय दृष्टि ने
हर एक बाधा पार कराई

गुरु-गोबिंद, दोनों के दरसन
साईं में हो जाते भाई

ध्यान धरे, भव-बंधन छूटे
शिरडी साईं, विश्व साईं

शिरडी साईं- विश्व साईं
साईं अपने सदा सहाई


अशोक व्यास

Saturday, February 11, 2012

कौन किसे सुन पाए है



नए सिरे से
अपना जीवन
लिखने का अभ्यास करो
अब तक
जो ना कर पाए
कर पाओगे, विश्वास करो
शब्द सखा हैं
इनके बल से
संबल पाकर उठ जाओ
जो सब कुछ है
जिससे सब
बस उससे ही आस करो


अपनेपन की 
परिभाषा का
नयापाठ सिखलाये है
काल कलुष का
रंग दिखा कर
नया पाठ सिखलाये है
हर पंछी का
राग निराला
कौन किसे सुन पाए है
साथ कोइ
कल हो या न हो
सूरज कल फिर आये है

                                                                      ---- अशोक व्यास
                                                                      न्यूयार्क, अमेरिका 
                                                                         ११ फरवरी 2012

Friday, February 10, 2012

अपने आप में मुस्कुराया


और फिर एक दिन अचानक
सब कुछ छूट जाने की कसक
की सघन अनुभूति को भोगता
वह
रुकते-चलते
चलते-रुकते
आ पहुंचा वहां
जहाँ 
फिर से
प्रश्न
स्वयं से छूट पाने
की सजगता का था

खेल
रोने-धोने
तड़पने-छटपटाने के
छोड़ते हुए
वह
फिर एक बार
उस पेड़ की छाँव में
जा बैठा
जहाँ
छाया में
घुला था
चिर मुक्ति का आश्वासन
मूँद कर आँखे
वह
अपने आप में मुस्कुराया
जैसे
अनंत ने कोइ गीत 
उसके साथ गुनगुनाया


अशोक व्यास
९ फरवरी २०१२ 

आनंदित निर्झर

छम छम बरसे प्रेमामृत सा खिला करूण अलोक अपरिमित मौन मधुर झीना झीना सा सरस सूक्ष्म  आनंदित निर्झर तन्मय बेसुध  लीन....  ...