Tuesday, November 29, 2011

पंख तुम्हारे अपने हैं

(स्वामी श्री ईश्वारानंद गिरिजी महाराज)चित्र- चंद्रशेखर
 
वो कहाँ से लाता है
पंख
इतने सुन्दर
इतने प्रखर
इस तरह मुक्ति की उड़ान का अनुभव
सुलभ करवाने वाले
 
सोच कर
देखा जब उसकी तरफ
 
नहीं लगता उसे देख कर
वो इतने सही माप वाले पंख
मेरे लिए
कहीं से लाने का कार्य करे
वह तो
मगन है
तन्मय है
अपने परम मुक्ति के सिंहासन पर आसीन
मुग्ध हर सांस के अमृतमय संगीत को सुनता
असीम मुस्कान का उजियारा छिटकाता
 
तो फिर ये पंख
प्रश्न सुन कर
मौन में कह दिया 
उसकी करूणामय दृष्टि ने
'पंख तुम्हारे अपने हैं
नित्य तुम्हारे साथ हैं
मैं तो बस बोध जगाता हूँ
तुम क्या हो
ये तुम्हें बताता हूँ'
 
 
अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
२९ नवम्बर २०११                  

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

कोई बता दे,
उड़ हम पायें।

संतोष कुमार said...

Sunder kavita ghahre bhaw ....
Aabhaar...!!

कविता

कविता न नारा न विज्ञापन कविता सत्य खोजता मेरा मन कविता न दर्शन न प्रदर्शन कविता अनंत से खेलता बचपन कव...