Friday, November 18, 2011

जय जय जीवन, जय जय जीवन

(पूज्य स्वामी श्री ईश्वारानंद गिरिजी महाराज, जिनके वचनों पर मनन ही इस कविता का मुख्य आधार है)

जय जय जीवन, जय जय जीवन
जय ये सांसों का आवागमन
ये कौन रचे अनुभव आँगन
उसकी महिमा का अभिनन्दन

जय जय जीवन, जय जय जीवन
जय सहज, सुकोमल अपनापन
ये कौन रचे सम्बन्ध सघन
उसकी महिमा का नित वंदन

जय जय जीवन, जय जय जीवन
जय सृजनशील यह स्पंदन
ये कौन रचे उन्नत चिंतन
उसकी महिमा को नित्य नमन

जय जय जीवन, जय जय जीवन
जय शुद्ध प्रेम का यह सावन
ये कौन रचे विस्मय का धन
उसकी महिमा का आलिंगन

जय जय जीवन, जय जय जीवन
जय जय जीवन, जय जय जीवन  

तुम अमर प्रेम के सहचर हो
तुम कैसा अनुपम सा वर हो
बन कर मेरी पहचान गति 
यूँ लगता, मुझ से नश्वर हो

जय जय जीवन, जय जय जीवन

अब मेरा मौन कर दो सुन्दर
अब अमृत की है प्यास मुखर
इन सीमाओं को हटा भी दो
मैं उद्गम दरसन को तत्पर

जय जय जीवन, जय जय जीवन
जय जय जीवन, जय जय जीवन

ओ काल सखा! ओ चतुर चपल
अब छोडो भी अपना यह छल
दिखला दो अपना परम भाव
तुम भी निश्छल, मैं भी निश्छल

जय जय जीवन, जय जय जीवन
जय जय जीवन, जय जय जीवन

पग पग पर तेरा आराधन
हर सांस, कृपा का है सिंचन
मैं धन्य तुम्हारे होने से
सारा वैभव तुमको अर्पण

जय जय जीवन, जय जय जीवन
अब मृत्युंजय में नित्य रमण

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
१८ नवम्बर 2011        

   
         

11 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

जय जय जीवन, तेरी जय हो।

अनुपमा त्रिपाठी... said...

जय जय जीवन, जय जय जीवन अब मृत्युंजय में नित्य रमण


बहुत सुंदर रचना है ...इसे सुरबद्ध कर गाना चाहिए..सुंदर वंदना है ...

अनुपमा त्रिपाठी... said...

आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है ... नयी पुरानी हलचल कल शनिवार 19-11-11 को | कृपया पधारें और अपने अमूल्य विचार ज़रूर दें...

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

पग पग पर तेरा आराधन
हर सांस, कृपा का है सिंचन
मैं धन्य तुम्हारे होने से
सारा वैभव तुमको अर्पण

सुंदर सार्थक पावन भाव.....

Prakash Jain said...

Sundar...Poori kavita mein bhaav ke saath-saath Rhyme pattern bahut pasand aaya....


www.poeticprakash.com

सदा said...

पग पग पर तेरा आराधन
हर सांस, कृपा का है सिंचन
मैं धन्य तुम्हारे होने से
सारा वैभव तुमको अर्पण
भावमय करते शब्‍द ।

Dr.Nidhi Tandon said...

जय हो!!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत ही अच्छा लगा सर!

सादर

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

जय जय जीवन....
बहुत सुन्दर रचना....
सादर बधाई...

Mamta Bajpai said...

बहुत अच्छी रचना ...बहुत बधाई

Rakesh Kumar said...

जय हो,जय हो ,जय हो
श्री सतगुरु महाराज जी की जै हो.

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