Thursday, October 6, 2011

मधुर मौन नगर तक




 
उस दिन
नन्हे बेटे ने पूछा
"भगवान् को हिचकी आती है क्या?"
उसने सुना था
जब कोई याद करता है
तो हिचकी आती है
 
 
उस दिन
नन्ही बिटिया ने कहा
"भगवान् अपने
सिवा किसी से बात नहीं करते.."
तब
माँ बोली
". क्योंकि उनके अलावा कोई है 
ही नहीं"
 
पिता ने
अपनी चेतना द्वारा
मधुर मौन नगर तक की यात्रा
के साक्षी बने रहे
 
 
 
अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका          


2 comments:

वन्दना said...

बहुत सुन्दर्।

Rakesh Kumar said...

क्या बात है ,अशोक भाई.

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति है आपकी.

मौन को मुखर करती हुई.

विजयदशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ.

आनंदित निर्झर

छम छम बरसे प्रेमामृत सा खिला करूण अलोक अपरिमित मौन मधुर झीना झीना सा सरस सूक्ष्म  आनंदित निर्झर तन्मय बेसुध  लीन....  ...