Friday, September 23, 2011

रस सागर में स्नान करो ना






रस सागर में स्नान करो ना
जीवन का आव्हान करो ना
लिए साथ में प्रेम की भाषा
अब नूतन प्रस्थान करो ना

अपनेपन का मान करो ना
हर मुश्किल आसान करो ना
वो जो गुणातीत है प्यारे
तुम उसका गुणगान करो ना
 
 
-अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
२३ सितम्बर २०११  
 
 

1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

सच है, स्वीकार्य है।

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...