Thursday, May 26, 2011

मुझे कुछ हो गया है








अब 
दिन पर दिन
बढ़ती जा रही आश्वस्ति
तुम्हारे साथ की,
उज्जवल परत
खुलने लगी है
हर एक बात की

अब
मेरी साँसों में
तुम्हारे होने की सौरभ का 
नशा सा छाया है,
उत्सुकता से देखता हूँ
हर स्थिति में
अब कौन सा रूप लेकर
मेरा चिर सखा आया है

अब 
उल्लास है, मस्ती है, आनंद है
पग पग पर
तुम्हारी कृपा का छंद है

मौन में उमड़ रहा है
मधुर आलाप,
जैसे ज्योतिस्तंभ प्रकट हो
हर ले सब संताप

ये किसने छू दिया है मुझको
इस तरह की
'मैं' है पर 'मैं' खो गया है
ऐसा लगता है
             मुझे कुछ हो गया है         

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
२६ मई २०११    

2 comments:

वन्दना said...

ये किसने छू दिया है मुझकोइस तरह की'मैं' है पर 'मैं' खो गया हैऐसा लगता है मुझे कुछ हो गया है

वाह …………गज़ब कहा मै है पर मै खो गया है …………।काश ऐसा हो जाये।

प्रवीण पाण्डेय said...

यह सुखद अनुभव सदा ही बना रहे।

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...