Sunday, May 8, 2011

वो मिल जाएगा तुझे


चुरा ले गया है कोई, चोरी का सामान
रपट लिखाना चोर की, नहीं रहा आसान

खाली मन शैतान है, खाली मन भगवान
वो मिल जाएगा तुझे, जिसकी है पहचान

सत्य नदी है सामने, फिर भी है अनजान
उद्यम बिन सिद्धि नहीं, संग रहे अनुमान

एक बार छू कर ज़रा, देख खुला है द्वार
बिन कोशिश तो आस्मां, है पिंजरे के पार

अनुभव भी अंतिम नहीं, अंतिम अनुभव मूल
अंतरतम ने सुन लिया, क्या कहता है फूल


अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
८ मई २०११           

 

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

रपट लिखाना चोर की, नहीं रहा आसान

किससे लिखवायें।

अरूण साथी said...

sundar sir ji

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...