Wednesday, April 20, 2011

प्रखर दीप ने पथ दर्शाया


 
प्रखर दीप ने पथ दर्शाया
गिर जाने से मुझे बचाया
कृतज्ञता से भर कर मैंने
नैनों से आभार जताया
लगा कोइ लौ में मुस्काया
मुझ पर अपना प्रेम दिखाया
कहा, धन्य हो तुम भी प्यारे
तेज़ हवा से मुझे बचाया

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
२० अप्रैल २०११  

 



 
झे      

1 comment:

anupama's sukrity ! said...

kritagyata se bhari sunder rachna ..!

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...