Friday, January 14, 2011

विराट शिशु होने का बोध



शब्द सारे 
उसके चरणों पर धर,
छोड़ कर
उस पर
अपनी हर सोच और क्रिया का 
दारोमदार 
 
हर दिन
हर क्षण
हर स्थिति में
निश्चिंत होकर 
उसके दिए 'शब्दों' की व्यवस्था से 
कर लेता हूँ व्यवहार 
 
विराट शिशु होने का बोध 
बढाता है
समन्वय,
आनंद और प्यार,
यह बोध जगाने वाले 
श्री गुरु चरणों में
नमन है
बारम्बार.
 
अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका
१४ जनवरी 2011


1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

गुरु के शब्द आदेश हैं।

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...