Saturday, January 15, 2011

सारे जग में अपनापन है

 


अपने भीतर 
सर्वोत्तम की उपस्थिति को
activate करता 
प्रार्थनामय मन है

नित्य करता हूँ प्रार्थना
ताकि बोध सतह पर 
activate रहे वह 
जिससे सारा एक्शन है
 
उससे जुड़े बिना 
अकेलापन, अधूरापन
उससे जुड़ कर
सारे जग में अपनापन है
 
अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका
शनिवार, १५ जनवरी 2011

1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

हृदय खोल अब अनुभव करना।

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...