Monday, December 13, 2010

दिव्य शपथ है

 
अमृत पथ है 
दिव्य शपथ है
शांति प्रदायक
प्रेम का व्रत है


आनंद उत्सव
साथ सतत है
ज्योतिर्मय 
अपना भारत है

शीतल मन
उजियारा गाये
उसका सुमिरन 
नित्य सुहाए 
 
धरती आँगन 
अम्बर छत है
अमृत पथ है
दिव्य शपथ है
 
 
अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 
१३ दिसंबर 2010

1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

शपथ की दिव्यता बनी रहे।

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...