Wednesday, December 8, 2010

नींव प्यार के किस्सो की मजबूत रहे

जो भी हो
आनंद तुम्हारा अपना है
सच होकर भी
सपना जो है, सपना है
२ 
अनुभूति पथ फूलों के संग कांटे भी 
सुन्दरता है वहां, जहाँ सब अपना है

मन के जंगल में सावन के आने पर
यूँ लगता है, पग-पग पर एक सपना है

आस्तीन में पाल-पाल कर रखे थे
अब कहते हैं, इनसे हमको बचना है

आसां है विध्वंस जगा देना छुप कर
मुश्किल तो ये प्रेम-भाव की रचना है

सोने-जगने के तय वक्त का वक्त नहीं 
युद्ध काल में नित्य-निरंतर जगना है

हुआ बहुत विश्राम बैठ कर आँगन में 
अब होना है सजग, नहीं अब थकना है

बात वही है, रूप बदल कर आयी है
बोध सत्य का बाँध, कमर को कसना है

नींव प्यार के किस्सो की मजबूत रहे 
इसीलिए सीमा पर साहस रखना है



अशोक व्यास 
बुधवार, ८ दिसंबर २०१० 



2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

प्यार उठाने के लिये बहुत साहस चाहिये होता है।

Rashmi savita @ IITR said...

नींव प्यार के किस्सो की मजबूत रहे
इसीलिए सीमा पर साहस रखना है
....nice work.... there sud dare for love.

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