Monday, November 22, 2010

साँसों में सजा है अनंत का उपहार


 साँसों में सजा है अनंत का उपहार
संकेत मात्र से मिल जाता है संसार
 
उसकी दृष्टि से मुखरित है असीम 
जाग्रत है प्यार की अनवरत धार 
उसका होने से हो जाता है सब कुछ
खुल जाता है हर एक बात का सार
 
वह जब चाहे छुड़ा कर सीमा का खेल
खोल देता है नित्य विस्तृत विस्तार 
लो, अनंत वैभव में दमकता मन लेकर
चला मैं मंगल कामना के रथ पर सवार

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
सोमवार, २२ नवम्बर २०१०





1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

साँसों में सजा है अनंत का उपहार

यही उपहार के सारे अनन्त तक पहुँचा जा सकता है।

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