Friday, October 15, 2010

किरण दे रही दस्तक





जब जब तेरी याद की चादर ओढी है
अपनी हर मुश्किल की चर्चा छोड़ी है
तेरी रहमत में रम जाने की धुन ले 
फुरसत जो भी है, लगता है थोड़ी है


रात उदासी का मंजर था, बीत गया
फिर से उजियारे का पंछी जीत गया
किरण दे रही दस्तक अब घर-द्वारे पर
धड़कन में हो गया अंकुरित गीत नया



अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
१५ अक्टूबर २०१०


1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

किरण की दस्तक दिन का प्रतीक है।

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