Wednesday, October 13, 2010

अनूठी सौगात

भागने के लिए
रास्ता नहीं कोई दूसरा
गंतव्य को नकारना 
नहीं तुम्हारे हाथ

मुड कर देखना 
व्यर्थ है हर तरह से
देखो आगे
निश्चय के साथ
 
मत करो संकोच
प्रकट करते हुए
अपनी स्वछन्द 
आत्मा की बात

धरी ना रह जाए
सुरक्षित है तुममें
सृष्टि के लिए
जो अनूठी सौगात 
 
अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 

1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

सबके लिये आवश्यक है कि वे अपनी क्षमताओं को पहचाने।

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...