Monday, June 21, 2010

देख मुझे देख


उसने फिर कहा
देख मुझे देख
एक हूँ मैं एक
मत उलझ रूप में
मत उलझ नाम में
किसी चुनौती के आगे
घुटने मत टेक

देख मुझे देख
जल में, थल में
गगन मंडल मे 

हर स्थल में
सत्य सनातन है
मेरे होने की
मंगल रेख

देख मुझे देख
उन आँखों से
जिनमें जाग्रत
गुरुकृपा से विवेक

खोने पाने की फिक्र छोड़
बन माध्यम 
किये जा 
कर्म सारे नेक 
देख मुझे देख 


अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 
सुबह ६ बज कर ३५ मिनट 
सोमवार, २१ जून २०१० 


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