नव प्रभात
अपने हाथ
सृजनशील
हर एक बात
किरण किरण
उजियारा
हर क्षण
कितना प्यारा
सांस सांस
आस जगाता जाए
मिल मिल कर
प्यास बढाता जाए
जीवन है प्रेम व्रत
उत्सव है अनवरत
अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
सुबह ५ बज कर ५० मिनट
१४ जून २०१०
है कुछ बात दिखती नहीं जो पर करती है असर ऐसी की जो दीखता है इसी से होता मुखर है कुछ बात जिसे बनाने बैठता दिन -...
No comments:
Post a Comment