Saturday, June 5, 2010

आस जेब में धरी है

और भी हैं बातें कई
सत्य की तलाश से पहले
कह कर
सच तक पहुँचने की यात्रा
को स्थगित करता
हूँ हर दिन
फिर भी
ये आस जेब में धरी है कहीं 
कि कहीं से
मेरे चारों ओर
उजाला उंडेल कर
विस्मित कर देगा
सत्य
अपने आप मुझे 

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
सुबह १० बज कर ४५ मिनट
शनिवार, ५ जून 2010

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