Wednesday, May 19, 2010

निश्चय करने की ताकत

(गेंद बिसर जाती है, उसकी उछाल याद रह जाती है - चित्र - अशोक व्यास)

कभी कभी
एक ही दिन में
कितने रंगों वाले भाव
मन के आँगन में
मेहमान बन जाते हैं 

कोई उल्लास जगाते हैं
कोई अवसाद बढ़ाते हैं
कोई सब एक करते
कोई दीवार बनाते हैं


आज के दिन
किस भाव का
करें
मन में स्वागत,
कौन देता है 
यह निश्चय 
करने की ताकत?



अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
७ बज कर ४५ मिनट
बुधवार, १९ मई २०१०

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