Thursday, April 22, 2010

हर आरोपित सीमा के पार

(मेरा न्यूयार्क - जहाँ पेड़ और इमारतों के बीच होता है संवाद, चित्र -अशोक व्यास )

१ 
सुबह उठ कर
करना होता है चयन
फिर से सो जाऊं
या बिस्तर छोड़
अपनी जाग्रत
अवस्था अपनाऊँ


चुनना पग पग पर
हमारा जीवन बनाता है
पर सही चयन करना
हमें कोई नहीं सिखाता है


कई बार 
डर या चीख-पुकार
छीन लेते हैं
चुनने का अधिकार


चुनना स्वतंत्रता और आत्म निर्भरता का
विलक्षण उपहार है
पर मुश्किल है समझना, चयन के पीछे
 अहंकार है या प्यार है

हम सीमाओं में उलझ कर सोचते हैं
बस छोटा सा हमारा विस्तार है
उसे नहीं देखते जो हमेशा हमारा है
और हर आरोपित सीमा के पार है

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
सुबह ६ बज कर ५८ मिनट
गुरुवार, अप्रैल २२, २०१०

No comments:

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...