Thursday, March 25, 2010

148-प्रमाद ही मृत्यु है'

(स्वामी श्री ईश्वारानंद गिरिजी महाराज, शोभा यात्रा, आबू पर्वत, भारत         चित्र-अमित गांगुली)

वह जो माँ है
देखती है सब कुछ 
करती है सचेत खतरे के प्रति
कभी बोल कर कभी संकेत से

कई बार 
समझ कर भी नासमझ बने रहते 
माँ के बेटे

जब छोटे थे
तब प्रमाद के कारण
हार जाते थे
छोटे छोटे खेल

अब बड़े होकर
जब सारा संसार
खेल मैदान है

सुस्ती के कारण
हार सकते हैं अपने आपको 
अपने मूल्यों, अपनी संस्कृति और अपनी अस्मिता को 
शायद इसीलिये 
एक दिन गुरु ने कहा था
'प्रमाद ही मृत्यु है'


अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
गुरुवार, २५ मार्च २०१०
सुबह ७ बज कर २४ मिनट

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