Thursday, February 11, 2010

विराट के चरणों में


उल्लास और स्फूर्ति के नए आभूषण
बनाओ सांसो से
पहनाओ सांसो को

झिलमिलाने दो इस चमक को
अपनी मुस्कान में

उन्ड़ेलो शुभ्र भाव का रस
अपने शब्दों में

मौन में
जब उतरता है
अनुभव माधुर्य का
तुम्हारे लिए
तुम्हारे भीतर से

करो सत्कार इसका
चढ़ा कर 
कृतज्ञता के
नव सुमन
विराट के चरणों में


अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
फरवरी ११, १०
सुबह ८ बज कर ५३ मिनट

1 comment:

संजय भास्कर said...

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...