Wednesday, February 10, 2010

104 वीं कविता/ अपना कर शीतल व्यवहार




बर्फ उतरती है कैसे 
इतनी सारी
कहाँ होती है
ये तैय्यारी


शाखाओं पर बिछी बर्फ
ज्यादा सुन्दर है
या मकान की छत वाली,
या फिर ये जिससे
सफ़ेद हो गयी गाड़ियां काली

३ 
सौंदर्य और सुरक्षा,
हम इन दोनों के लिए
कई बार अपनी शांति गँवा बैठते हैं
क्या बर्फ के साथ 
उतरता है
शांति का सन्देश कोई

४ 

नए सिरे से उतर कर
बर्फ
दिलाती है याद
सृष्टा अब भी खेल दिखाना चाहता है
अब भी
उसे चाहिए कि हम
नए सिरे से सीखें
कैसे रखें अपना ध्यान

हर चुनौती के पार
अपना कर शीतल व्यवहार
अक्रूर बन कर 
सब तक पहुंचाए प्यार का उपहार




अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
१० फरवरी १०
८ बज कर ४२ मिनट

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