Thursday, February 4, 2010

शुद्ध प्रेम का उपहार



लक्ष्य क्या है

लक्ष्य की पहचान करते करते
जब कर रहा होता हूं अपनी पहचान
अपने भीतर छुपे हुए
खजाने की तरफ जाता है ध्यान

सहसा
विस्तार का द्वार खुल जाता है
सहसा असीम समंदर गरज जाता है

लक्ष्य मेरा
और कुछ नहीं
इस अनंत वैभव वाली पहचान को
नित्य जगाना है
सृजनात्मक रस से सब तक
शुद्ध प्रेम का उपहार
पहुंचाना है


अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
सुबह ७ बज कर २८ मिनट
फरवरी ४, २०१०

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