Wednesday, February 3, 2010

क्यों हम अपने आपको नकारते हैं



कभी कभी हम नया कदम उठाने से पहले
अपेक्षाओं के बोझ से दब जाते हैं
कभी कभी हम प्रतिक्रिया पर इतना ध्यान लगाते हैं
कि अपने मूल को भूल जाते हैं

क्यों हम अपने आपको नकारते हैं
क्यों पराई दृष्टी इस तरह स्वीकारते हैं
कि अपने कबूतर को भुला कर
दूसरों की बिल्ली को पुचकारते हैं


प्यार बाहर तब ही जाएगा
जब अपने भीतर पनप पायेगा
आत्म सौन्दर्य को देखे बिना
जो प्यार सा लगेगा, मुरझा जाएगा



अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
३ फरवरी २०१०
सुबह ८ बज कर १ मिनट

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