Tuesday, January 5, 2010

कोई अनजाना नहीं है


उत्साह का संचार करती बात का अभिनन्दन
प्रेम मय व्यवहार करते साथ का अभिनन्दन
जब समर्पित दृष्टि हो तो ऐसा हो जाता कभी
मन प्रफुल्लित हो करे हर बात का अभिनन्दन



जब कभी देखा ठहर कर
अपने से आगे निकल कर
पा लिया है उसके दर को
कामना का स्वर बदल कर



चल तुझे झूला झुलाऊँ
चांदनी का रथ सजाऊँ
उजलेपन के स्त्रोत से
आज मैं सबको मिलाऊँ



दूर तक जाना नहीं है
और कुछ पाना नहीं है
है सभी अपने से चेहरे
कोई अनजाना नहीं है



मन मे बस कर चल दिए जो
उनका क्यों कर शोक करना
जिनसे साँसों मे सजगता
उन स्वरों को रोक रखना



आज कुछ ऐसे पुकारो
एक एक क्षण को संवारो
ले के धीरज ढेर सारा
आज उसका पथ निहारो



अशोक व्यास
न्यू यार्क, अमेरिका
जन ५, 2010
मंगलवार, सुबह ६ बज कर ३३ मिनट


No comments:

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...