Thursday, December 29, 2016

बहती धार

नींद लहर 
लहर नींद 
किनारा आँख 
आँख किनारा 
बहती धार 
चेतन से सुप्त अवस्था तक 

लौट लौट 
जाग्रत होने के प्रयास करता 

नींद के लोक से परे लौट कर 
देखता हूँ 
जगता हूँ प्रयत्नपूर्वक 

सोने से कतराता हूँ 
और फिर अकेला अकेला 
मुस्कुराता हूँ 

अशोक व्यास 

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