Saturday, September 24, 2016

समय सीमा पार



लिखने वाले के 
असंतोष और त्रुटि का 
परिणाम 
पृष्ठ को भुगतना होता 
फट फट कर मिट जाने का 
अंजाम 

२ 
क्या इसी तरह जगत लिखने वाला 
हमारी अपूर्णता पर कसमसाता 

नए सिरे से 
हमे न रच देने साँसों की श्रृंखला पर 
विराम लगाता 

३ 
शब्द अब 
समय सापेक्ष 
होकर भी 
समय सीमा पार  है 
लिखना 
अपने से 
वहां जुड़ना है 
जहां सीमातीत विस्तार है 


अशोक व्यास 
१५ सितंबर २०१६ 
न्यूयार्क,

1 comment:

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