Thursday, February 18, 2016

सार्थक संवाद


उसके हमदर्द बन अपनों पे न आघात करो 

छोडो ये पैरवी, अब और कोई बात करो

                             -अशोक व्यास







 विरासत हमारी सदियों हमें जो कुछ सिखाती है 

उस सीख की समझ, हमारी प्रतिक्रिया दिखाती है 

 

हममें कितना उतावलापन है,  कितना संयम है 

क्या हम सुई और तलवार को परखने में सक्षम हैं ?


यदि हम देख नहीं पाते दृश्य विहंगम 

तो हमें नचाने लगेगी, शत्रु की सरगम 



 अब घटिया नारों का सूत्र ले हम लोग करने लगे एक दूसरे की जांच पड़ताल 

क्या विद्यार्थी, क्या नेता, क्या पत्रकार, लगभग सब का हो गया है यही हाल 

 


त्याग, तपस्या की परम्परा को रखें याद 

जाग्रत रहे अखंड भारत का प्रखर नाद

 

 

बवंडर है जिस बात का, उसकी तह तक जाना है 

ऐसे भारत विरोधी स्वर को अब जड़ से मिटाना है 


क्यों एक दूसरे पर कीचड उछाल कर दुश्मन की शक्ति बढ़ाएं 

आवश्यक है राष्ट्रप्रेम वाली गहरी सोच से सार्थक संवाद जगाएं 

 

अशोक व्यास 

१८ फरवरी २०१६


 

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