Saturday, December 28, 2013

अमृत पथ पर ..





जीवन उन्नत करने वाली बात कर्म में शामिल है 
जो अपने संग चल न पाये, उसे कहाँ कुछ हासिल है 


अमृत पथ पर चलने वाली सूझ जहाँ से आती है 
उस करूणामय दिव्य सखा के चरणो में मेरा दिल है 


वहाँ बसेरा नित्य रहे, अब इसका बोध है साँसों में 
जहां जहां केशव प्यारे के भक्त जानो की महफ़िल है 


लहरों के आने -जाने से ही तो होती है शोभा इसकी 
वरना तो चुपचाप, बेचारा, खोया-२ साहिल है 

अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 

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