Saturday, March 30, 2013

रास्ता


रास्ता थक के घर गया होगा 
पाँव मेरा किधर गया होगा 

संग अपने मैं चल नहीं पाया 
कोइ मुझमें गुजर गया होगा 
 
अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 
३० मार्च २ ० १ ३ 


2 comments:

Anupama Tripathi said...

प्रबल ईश्वर कृपा से गति बनी रहती है ....

प्रवीण पाण्डेय said...

पता नहीं कब बढ़ जाते हम,
पंथ लक्ष्य तक पड़ जाते कम।

आनंदित निर्झर

छम छम बरसे प्रेमामृत सा खिला करूण अलोक अपरिमित मौन मधुर झीना झीना सा सरस सूक्ष्म  आनंदित निर्झर तन्मय बेसुध  लीन....  ...