Sunday, December 9, 2012

जेट लेग से समाधि की ओर

(धूप आती है, छाया से बतियाती है - चित्र रुद्रानंद आश्रम, ऊना, हिमाचल प्रदेश 
मोबाइल क्लिक - अशोक व्यास )
1

यह एक कुछ 
जो जेट लेग कहलाता है 
रातों को नींद उड़ाता है 
जगा कर याद दिलाता है 
की उस भूमि से इंसान का गहरा नाता है 
जिसे  वह पीछे छोड़ कर आता है 

2

जागने के बाद 
हमें फिर से जागने होता है 
ताकि 
सोच इस तरह 
सज पाए 
की 
अनंत से अपनापन 
खिल खिल जाए 

3
जेटलेग हमें 
जागने और सोने के बीच 
 एक 
निर्वात में बिठाता है 
और 
चेतना को फिर से 
व्यस्थित होने का अवसर दिलाता है 

हमारी चेष्टाओं को मद्धम करके 
ये बाताता है 
की हम जो हैं, उसका परिचय 
जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति
तीनो से 
परे तक जाता है 


अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 

(जेट लेग से समाधि की ओर )




1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

जब मन शान्त हो जाता है, मनुष्य जीवन के जेटलैग से बाहर आ जाता है।

सुंदर मौन की गाथा

   है कुछ बात दिखती नहीं जो  पर करती है असर  ऐसी की जो दीखता है  इसी से होता मुखर  है कुछ बात जिसे बनाने  बैठता दिन -...